मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024

भरोसे भाग्य के

 रहना भाग्य भरोसे 

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रहना भरोसे भाग्य के, होता नहीं पुरुषार्थ है/

जब विघ्न बाधा सामने, सोता नहीं पुरुषार्थ है//


हैं फूल कांँटे साथ हीं ,इस ज़िन्दगी की राह में;

संघर्षमय जीवन अगर, खोता नहीं पुरुषार्थ है/


पीड़ित करे दुनिया मगर, हंँसते ठठा क्या खूब हैं;

हैं झेलते दुख दर्द पर, रोता नहीं पुरुषार्थ है/


करना मगर जिस कार्य को, करते उसे निर्द्वंद्व हैं;

पर और के अहसान को, ढोता नहीं पुरुषार्थ है/


है कौन दुश्मन दोस्त कैसा, सब बराबर मानते;

लेकिन भलाई वक़्त पे टोता नहीं पुरुषार्थ है/