सोमवार, 27 जनवरी 2020

मुण्डन-गीत

      मुण्डन गीत
  *************
आयल शुभ दिन माघ सप्तमी
गगनांगन शुक्लक-चान हे,
छप छप हजमा केश कटै छथि
मुण्डन गान सोहाओन हे।
परिछथि केश दादी सब मिलि
बढ़ल बड़ दियमान हे,
बम-बम बंकू डुगडुग डुग्गू
होरिला अथर्व-अयान हे।
रवि-शशि सम बड़ुवा दुहूं
बाबा मुख मुस्कान हे,
राम-लखन सन जोड़ी अतुलित
ने जग मे उपमा आन हे।
जीबू जीबू बौआ अथर्वजी
जीबू शताधिक अयान हे,
आस-विश्वास अहीं सब बाबू
मातु-पिता के प्राण हे।
वंश-शिरोमणि छथि दुइ बालक
बढ़बथु कुल केर शान हे।।

शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

जाड़ कतेक पड़ै छै यौ
*****************
बंकू बाबू डुग्गू बाबू
औ जाड़ कतेक पड़ै छै यौ।
सुटकल दुबकल रहियौ घर धरि
बड़ शीतलहरि लहरै छै यौ।
स्वेटर पहिरू टोपी पहिरू
से एहि सँ जाड़ टरै छै यौ।
धोन्हीं चादरि सुरुज नुकेला
उफ़!पछबा हाड़ गड़ै छै यौ।
हाँ,हाँ,टोपी नहि ने फेकू
एना मे कान ठरै छै यौ।
खोंता धेने चुनमुनियाँ सब
नहि बकरी घास चरै छै यौ।
कुकुर बिलैया कूँ कूँ म्याऊँ
कंबल सीरक हेरै छै यौ।
गामो घर मे बूढ़-पुरनियाँ
घूरे लग जाय अरै छै यौ।
जाड़क अमरित आगि कहाबय
दुखिया संताप हरै छै यौ।
जाड़ कसैया बड़ निर्दैया
ओ ककरो ने छोड़ै छै यौ।
ठहरू ठहरू थोड़हि दिन बस
जाड़ोक उमेर ढरै छै यौ।
नेना भुटका घर मे बैसल
ई कविता याद करै छै यौ।

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

     हमरा सबहक नेताजी
 ******************
रगड़ा झगड़ा ठनने फीरथि
से हमरा सबहक नेताजी।
पूज्य बनल रहता ओ कोना
बेबात फसाद करेता जी।
बतकुट्टनि के खेती सनगर
आ सौंसे आगि लगेता जी।
प्राण बसय हुनकर सत्ता मे
कुर्सी लय ग़दर मचेता जी।
चारि बरस धरि निमुआने सन
पचमे आबि फुसियेता जी।
जाइत-पाइत धर्मास्त्र बल
मरछाउर छीटि सुतेता जी।
आगाँ पाछाँ मोटर पों पों
औ अगबे धूलि फकेता जी।
चलती हुनकर की देखै छी
चलती देखबथि चहेता जी।
केहन अनबुझ बूझथि सबके
पढ़ने बिनु खूब पढ़ेता जी।