रहना भाग्य भरोसे
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रहना भरोसे भाग्य के, होता नहीं पुरुषार्थ है/
जब विघ्न बाधा सामने, सोता नहीं पुरुषार्थ है//
हैं फूल कांँटे साथ हीं ,इस ज़िन्दगी की राह में;
संघर्षमय जीवन अगर, खोता नहीं पुरुषार्थ है/
पीड़ित करे दुनिया मगर, हंँसते ठठा क्या खूब हैं;
हैं झेलते दुख दर्द पर, रोता नहीं पुरुषार्थ है/
करना मगर जिस कार्य को, करते उसे निर्द्वंद्व हैं;
पर और के अहसान को, ढोता नहीं पुरुषार्थ है/
है कौन दुश्मन दोस्त कैसा, सब बराबर मानते;
लेकिन भलाई वक़्त पे टोता नहीं पुरुषार्थ है/