मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024

भरोसे भाग्य के

 रहना भाग्य भरोसे 

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रहना भरोसे भाग्य के, होता नहीं पुरुषार्थ है/

जब विघ्न बाधा सामने, सोता नहीं पुरुषार्थ है//


हैं फूल कांँटे साथ हीं ,इस ज़िन्दगी की राह में;

संघर्षमय जीवन अगर, खोता नहीं पुरुषार्थ है/


पीड़ित करे दुनिया मगर, हंँसते ठठा क्या खूब हैं;

हैं झेलते दुख दर्द पर, रोता नहीं पुरुषार्थ है/


करना मगर जिस कार्य को, करते उसे निर्द्वंद्व हैं;

पर और के अहसान को, ढोता नहीं पुरुषार्थ है/


है कौन दुश्मन दोस्त कैसा, सब बराबर मानते;

लेकिन भलाई वक़्त पे टोता नहीं पुरुषार्थ है/

शुक्रवार, 29 मई 2020

उतरल गगन सँ चान रे
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तीन बरस केर पूर्ण बयस भेल
देखल अद्भुत ज्ञान रे,
शुभे शुभ असीसथि अरिजन परिजन
जनम दिवस शुभकाम रे।
घर उतरल गगन सँ चान रे।।

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020



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घरे बैसल संभव,आना ने जाना।।

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

वैवाहिक वर्षगांठ शुभकामना
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पावन परिणयोत्सव की आज
शुभ वर्षगांठ फिर आया है।
सुर पंचम कूकी कोयल ने
आ बसंत मुस्काया है।।
सौभाग्य सदा यह रहे बनी
स्वजनों ने आशीष बर्षाया है।
हर्षित चर्चित परिजन सारे
'अथर्व-राज' की माया है।।
 जन्मदिवस शुभकामना
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ज़िन्दगी रुकती नहीं जब,
क्यूँकर अरे रुकेंगे हम!
गिरि-नद-निर्झर पार कर,
बढ़ते कदम चलेंगे हम।।
बीत गई वो बात गई,
क्या खुशियां क्या है ग़म!
है जन्मदिवस शुभकामना
आशिर्वचन है हरदम।।

सोमवार, 27 जनवरी 2020

मुण्डन-गीत

      मुण्डन गीत
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आयल शुभ दिन माघ सप्तमी
गगनांगन शुक्लक-चान हे,
छप छप हजमा केश कटै छथि
मुण्डन गान सोहाओन हे।
परिछथि केश दादी सब मिलि
बढ़ल बड़ दियमान हे,
बम-बम बंकू डुगडुग डुग्गू
होरिला अथर्व-अयान हे।
रवि-शशि सम बड़ुवा दुहूं
बाबा मुख मुस्कान हे,
राम-लखन सन जोड़ी अतुलित
ने जग मे उपमा आन हे।
जीबू जीबू बौआ अथर्वजी
जीबू शताधिक अयान हे,
आस-विश्वास अहीं सब बाबू
मातु-पिता के प्राण हे।
वंश-शिरोमणि छथि दुइ बालक
बढ़बथु कुल केर शान हे।।

शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

जाड़ कतेक पड़ै छै यौ
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बंकू बाबू डुग्गू बाबू
औ जाड़ कतेक पड़ै छै यौ।
सुटकल दुबकल रहियौ घर धरि
बड़ शीतलहरि लहरै छै यौ।
स्वेटर पहिरू टोपी पहिरू
से एहि सँ जाड़ टरै छै यौ।
धोन्हीं चादरि सुरुज नुकेला
उफ़!पछबा हाड़ गड़ै छै यौ।
हाँ,हाँ,टोपी नहि ने फेकू
एना मे कान ठरै छै यौ।
खोंता धेने चुनमुनियाँ सब
नहि बकरी घास चरै छै यौ।
कुकुर बिलैया कूँ कूँ म्याऊँ
कंबल सीरक हेरै छै यौ।
गामो घर मे बूढ़-पुरनियाँ
घूरे लग जाय अरै छै यौ।
जाड़क अमरित आगि कहाबय
दुखिया संताप हरै छै यौ।
जाड़ कसैया बड़ निर्दैया
ओ ककरो ने छोड़ै छै यौ।
ठहरू ठहरू थोड़हि दिन बस
जाड़ोक उमेर ढरै छै यौ।
नेना भुटका घर मे बैसल
ई कविता याद करै छै यौ।