गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019





इन परिंदों की तरह
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इन परिंदों की तरह अगर
अपना भी होता आकाश।
खींच लकीरें सीमाओं की
आपस में ना लड़ते काश।

उन्मुक्त उड़ान ग़र भर पाते
कैद न होते निज कारावास।
चाह जहाँ बस राह उधर ही
हो सारे जहाँ अपना आवास।

न सीमाओं के आर-पार तब
यूँ गिरते रहते जब-तब  लाश।
फिर क्यूँ होते  ख़ून के प्यासे
मानवता का ना होता ह्रास।

मन हो मुक्त हर कुंठा से
और प्राण न पाए त्रास।
इन परिंदों की तरह सदा
आकुल उड़ान की हो प्यास।

शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2019

  है शहीदों को नमन
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एक बार, बस एक बार
मचाने दो क्रंदन
अरि का करने दो मर्दन
अरे खोल दो बंधन
हमारे भीम अर्जुन का।

कब तक कायराना
छुपा वार वो झेलें
कब तक मूक हो सहें
खाते रहें ढेले
करने दो अब सिंहनाद
हुंकार भरने दो
प्रचंड पुरुषार्थ के आवेग से
प्रहार करने दो
देश के नाज़ के खातिर
प्रतिकार करने दो
आतंकी नरपिशाचों में
नहीं इंसानियत का स्पंदन
अरे खोल दो बंधन
हमारे भीम अर्जुन का।

मुट्ठीभर देशद्रोही जो
सिरे से सिरफिरे हैं ं
मानवाधिकार की आड़ चीखे
ख़ुद मानवता से गिरे हैं
कायर क्लीव वो ढोंगी
जा वैरी से मिले हैं
उन रक्तबीजों का
लहू चाट जाने दो
रणभेरी बजाकर अब
रणभूमि पाट देने दो
वीरों की गर्जना से
प्रकम्पित हो गगन
अरे खोल दो बंधन
हमारे भीम अर्जुन का।

शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

           मा शारदे
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मा शारदे,मा शारदे
हे मा शारदे।

भसियायल जा रहल छी
जिनगीक प्रवल धार मे
खेबब कोना कऽ नैया
भऽ बुद्धिहीन संसार मे
हमरो कने सम्हारि दे।
मा शारदे........
ई दुनियाक छै जे मेला
बड़ बड़ तकर झमेला
तनि ध्यान दे तू एम्हरो
मति मंद हम अकेला
तोँ आबि कऽ उबारि दे।
मा शारदे.........
भटकल फिरै छी सगरो
ने आस आब ककरो
सुनि ले नेहोरा हमर
नहि तऽ करबौ झगड़ो
एना नहि तोँ टारि दे।
मा शारदे.........
चंचल चपल बड़ मन रे
नहि विद्या सँ बढ़ि धन रे
कओन जतन से पायब
लागत कोना लगन रे
लऽ कऽ शरण तोँ तारि दे।
मा शारदे.........