रविवार, 31 मार्च 2019

पूछा करो सवाल
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पूछते रहे हो प्रश्न सिर्फ,सारे जहान के
खुद से भी कभी तो,पूछा करो सवाल।

ऐब ढूढना हीं हमेशा,रही शगल तुम्हारी
कुछ दिखे कि ऐसा,तूने किया कमाल।

करना कुछ कठिन है,बकना बड़ा आसान
चर्चा में बने रहने को,बेबात का बवाल।

किस्से वहीं क्या सुनें,छल गया बारंबार
विक्रम के कंधे अभी वो,जाए ना उस डाल।

भारत के महाभारत में,माया-युद्ध प्रपंच
भोलेभाले भटक भुलावे,जयजय करे निहाल।
         __अशोक झा'दुलार'

शनिवार, 30 मार्च 2019

जो हमारा है नहीं
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ना जाने क्या बात है
 कोई दिल को क्यूँ गवारा नहीं
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।

क्या पता उनको कभी
कि कोई मर मिटा है
खयालों में हीं उनके
हालात के हाथों पिटा है
आवारगी है ये कैसी
कि ढूँढे और सहारा नहीं।
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।।

परवाह हीं नहीं थोड़ी भी
कि आगे क्या अंजाम है
दीवानगी क्या नाम इसी का
नशा कैसी कैसा जाम है
समझ से बाहर समझ है ये
क्या ग़लत है क्या सही।
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।।

सोमवार, 25 मार्च 2019

[24/3, 12:51 am] अशोक झा 'दुलार': हो हर दिन होली
और हर रात दिवाली।
भरी रहे खुशियों से
जिंदगी की प्याली।
[24/3, 12:58 am] अशोक झा 'दुलार': वर्तमान की नज़र सामने
भविष्य देखता ऊपर है।
बिन बोले तस्वीर बोला
चलता साथ  भू पर है।
[25/3, 5:13 pm] अशोक झा 'दुलार': आज सम्भाले हो तू पापा
कल को मेरा आसमाँ।
तेरे दम से हीं तो मैं भी
कल संभालूँगा सारे जहाँ
[25/3, 5:24 pm] अशोक झा 'दुलार': मेरे कल का, आज है तू।
कल को मैं था,मगर आज
सबके दिल का सरताज है तू।।
[25/3, 5:34 pm] अशोक झा 'दुलार': मैं कड़ी हूँ तुम दोनों का
और, पीढ़ीयों का जंजीर हूँ।
मज़बूत बड़ी पकड़ है मेरी,
स्नेह-सरिता का मैंहीं निर्मल-नीर हूँ।।

रविवार, 24 मार्च 2019

हैप्पी हैप्पी होली
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प्यार के रंग से रंग दे सबको
नफ़रत की दीवार गिरा दे।
सिरफिरों के सिर पर थोड़ा
हैप्पी हैप्पी हाथ फिरा दे।।
तेरी ताकत ओ बच्चा
दुनिया का सच्चा पूँजी है।
बड़े बड़ों की बिगड़ी बातें
बनने की तू  हीं तो कुंजी है।।
      __अशोक झा'दुलार'
        भूल जाते हैं
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करे कोई भी कितना कुछ
हम इक दिन भूल जाते हैं

किया किसी का थोड़ा सा
हाँकते डींगें  फूल जाते हैं

कड़ी मेहनत किया जिसने
अक्सर हिस्से धूल पाते हैं

भाता नहीं जब भजन भूखे
डालकर फंदा  झूल जाते हैं

पावन कर्म होवें सच्चा तेरा
सब धर्मों का यह मूल पाते हैं
           __अशोक झा'दुलार'

बुधवार, 20 मार्च 2019

रंग भरे इस मौसम में
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रंग भरे इस मौसम में
कुछ तो रंग चुरा ले रे।।
बदरंग बनी है दुनियादारी
रंग-गुलाल उड़ा ले रे
रंग-रंगीली आई होली
बिछड़ों को आज मिला ले रे
रंग भरे इस मौसम में
कुछ तो रंग चुरा ले रे।।

वाद-विवाद-प्रतिवाद चले
पर संवाद भी चलने दे
ईर्ष्या-द्वेष,घृणारहित हो
मन से मिलन न टलने दे
औरों के हित-चिंतन से
दिल का दाग़ छुड़ा ले रे।
रंग भरे इस मौसम में
कुछ तो रंग चुरा ले रे।।
   __अशोक झा'दुलार'

मंगलवार, 19 मार्च 2019

क्यों बेरंग पड़े हो
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गूंज उठा संगीत धरा पर
हुआ तरंगित जीवन-राग।
उमक उठा है यौवन फिर
है रंग-रंगीला आया फाग।।
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
बदला रंग है धरा-गगन।
महमह मंजर आम्र-विटप
कूकती कोयल हुई मगन।।
नीली अलसी पीली सरसों
औ पलाश-वन लाल लाल।
कोमल-किसलय हरी-भरी
पवन-बसंती, उड़े गुलाल।।
सतरंगे इस मौसम में भी
क्यों बेरंग पड़े हो तुम।
जी लो जीभर इस क्षण को
ठिठके क्यों खड़े हो तुम।।
बीती बातें दो बिसार
ना सोचो क्या कल होगा।
प्रतिपल जी लो जीवन को
जनम सहज सुफल होगा।।
मेरा सफ़र अकेला
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ये दुनिया के मेले
जिनमें बड़े झमेले
ना गुरु ना चेला
मेरा सफ़र अकेला।

मिलकर साथ चले
मिलते रहे गले
क़िस्मत का हीं खेला
मेरा सफ़र अकेला।

फ़िक्र क्या है करना
मुसीबतों से लड़ना
पास ना हो धेला
मेरा सफ़र अकेला।

मौत से क्या डरना
पड़ेगा ही जब मरना
ये ज़िन्दगी अलबेला
मेरा सफ़र अकेला।

सोमवार, 18 मार्च 2019

हाय, नहीं मिल पाते हम
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दिल तो दिल है मचलता है
जब फितुर दिमागी चलता है
उलझे मन की मज़बूरी पर
एक कदम की दूरी पर
खुद का दर्द छुपाते हम
हाय, नहीं मिल पाते हम।।

हैं हज़ारों याद सुहानी
पर कड़वे हीं आगे आतीं
और घुलकर स्मृति-घट में
फेनिल फेनिल ऊपर छाती
खुद भी समझ ना पाते हम
हाय, नहीं मिल पाते हम।।

चाहे जितना जी जला लो
मियाद मगर तो होगी पूरी
घिसते घिसते घिस जाओगे
महकेंगे फिर रिश्ते कस्तूरी
चलो स्वयम् को समझाते हम
हाय, नहीं मिल पाते हम।।
     __अशोक झा'दुलार'

बुधवार, 13 मार्च 2019


ज़िन्दगी तेरे लिए
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ज़िन्दगी तेरे लिए
क्या क्या न किया
बेचैन रहा दिन-रात
पल भर न जिया।
हाय,ये क्या किया
मैंने ये क्या किया!

सोचा थोड़ा सुकूँ से
जीऊँगा ज़िन्दगी
अभी तो उम्र पड़ी है
क्या है धड़फड़ी
और और के फेर में
था लगा हड़बड़ी
उम्र तो तमाम हो गई
कहाँ जीया ज़िन्दगी?

सोमवार, 11 मार्च 2019

मुड़कर भी न देखा
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उसने मुड़कर भी न देखा,
और चला गया।
खड़ा देखता रह गया मैं,
जैसे छला गया।
बोला नहीं शब्द मगर अपनी,
फितरत जतला गया।
रिश्ते रहे मतलब भर शायद,
चुपचाप बतला गया।
उसने मुड़कर भी न देखा,
और चला गया।।
ये बेरुखी ये बेगानापन अरे,
अंदर दहला गया।
टकटकी लगाए रहा देखता,
आँसुओं नहला गया।
बातें याद आई उस दौड़ की,
जो हमें बहला गया।
उसने मुड़कर भी न देखा,
और चला गया।।

सोमवार, 4 मार्च 2019

शिव शंभू,शिव शंकर
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हे शिव शंभू,हे शिव शंकर
हे गंगाधर,हे प्रलयंकर
ताण्डव ऐसा कर दे भू पर
काँप आतंकी डोले थर थर
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।

मानवता आर्त पुकार रही
रक्षार्थ उठा त्रिशूल भयंकर
जगा जगा अब भाव मसानी
बम-बम हर-हर हो भारत भर
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।

भर दे भाव अभाव मिटे
कल्मष-कटुता स्वभाव मिटे
सुबुद्धि-विवेक जगे जन जन में
पूजूँ तुझको कंकड़-कंकड़
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।