जो हमारा है नहीं
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ना जाने क्या बात है
कोई दिल को क्यूँ गवारा नहीं
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।
क्या पता उनको कभी
कि कोई मर मिटा है
खयालों में हीं उनके
हालात के हाथों पिटा है
आवारगी है ये कैसी
कि ढूँढे और सहारा नहीं।
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।।
परवाह हीं नहीं थोड़ी भी
कि आगे क्या अंजाम है
दीवानगी क्या नाम इसी का
नशा कैसी कैसा जाम है
समझ से बाहर समझ है ये
क्या ग़लत है क्या सही।
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।।
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ना जाने क्या बात है
कोई दिल को क्यूँ गवारा नहीं
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।
क्या पता उनको कभी
कि कोई मर मिटा है
खयालों में हीं उनके
हालात के हाथों पिटा है
आवारगी है ये कैसी
कि ढूँढे और सहारा नहीं।
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।।
परवाह हीं नहीं थोड़ी भी
कि आगे क्या अंजाम है
दीवानगी क्या नाम इसी का
नशा कैसी कैसा जाम है
समझ से बाहर समझ है ये
क्या ग़लत है क्या सही।
पागल बना उसके लिए
जो हमारा है नहीं।।
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