क्यों बेरंग पड़े हो
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गूंज उठा संगीत धरा पर
हुआ तरंगित जीवन-राग।
उमक उठा है यौवन फिर
है रंग-रंगीला आया फाग।।
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
बदला रंग है धरा-गगन।
महमह मंजर आम्र-विटप
कूकती कोयल हुई मगन।।
नीली अलसी पीली सरसों
औ पलाश-वन लाल लाल।
कोमल-किसलय हरी-भरी
पवन-बसंती, उड़े गुलाल।।
सतरंगे इस मौसम में भी
क्यों बेरंग पड़े हो तुम।
जी लो जीभर इस क्षण को
ठिठके क्यों खड़े हो तुम।।
बीती बातें दो बिसार
ना सोचो क्या कल होगा।
प्रतिपल जी लो जीवन को
जनम सहज सुफल होगा।।
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गूंज उठा संगीत धरा पर
हुआ तरंगित जीवन-राग।
उमक उठा है यौवन फिर
है रंग-रंगीला आया फाग।।
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
बदला रंग है धरा-गगन।
महमह मंजर आम्र-विटप
कूकती कोयल हुई मगन।।
नीली अलसी पीली सरसों
औ पलाश-वन लाल लाल।
कोमल-किसलय हरी-भरी
पवन-बसंती, उड़े गुलाल।।
सतरंगे इस मौसम में भी
क्यों बेरंग पड़े हो तुम।
जी लो जीभर इस क्षण को
ठिठके क्यों खड़े हो तुम।।
बीती बातें दो बिसार
ना सोचो क्या कल होगा।
प्रतिपल जी लो जीवन को
जनम सहज सुफल होगा।।
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