भूल जाते हैं
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करे कोई भी कितना कुछ
हम इक दिन भूल जाते हैं
किया किसी का थोड़ा सा
हाँकते डींगें फूल जाते हैं
कड़ी मेहनत किया जिसने
अक्सर हिस्से धूल पाते हैं
भाता नहीं जब भजन भूखे
डालकर फंदा झूल जाते हैं
पावन कर्म होवें सच्चा तेरा
सब धर्मों का यह मूल पाते हैं
__अशोक झा'दुलार'
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करे कोई भी कितना कुछ
हम इक दिन भूल जाते हैं
किया किसी का थोड़ा सा
हाँकते डींगें फूल जाते हैं
कड़ी मेहनत किया जिसने
अक्सर हिस्से धूल पाते हैं
भाता नहीं जब भजन भूखे
डालकर फंदा झूल जाते हैं
पावन कर्म होवें सच्चा तेरा
सब धर्मों का यह मूल पाते हैं
__अशोक झा'दुलार'
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