शिव शंभू,शिव शंकर
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हे शिव शंभू,हे शिव शंकर
हे गंगाधर,हे प्रलयंकर
ताण्डव ऐसा कर दे भू पर
काँप आतंकी डोले थर थर
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।
मानवता आर्त पुकार रही
रक्षार्थ उठा त्रिशूल भयंकर
जगा जगा अब भाव मसानी
बम-बम हर-हर हो भारत भर
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।
भर दे भाव अभाव मिटे
कल्मष-कटुता स्वभाव मिटे
सुबुद्धि-विवेक जगे जन जन में
पूजूँ तुझको कंकड़-कंकड़
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।
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हे शिव शंभू,हे शिव शंकर
हे गंगाधर,हे प्रलयंकर
ताण्डव ऐसा कर दे भू पर
काँप आतंकी डोले थर थर
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।
मानवता आर्त पुकार रही
रक्षार्थ उठा त्रिशूल भयंकर
जगा जगा अब भाव मसानी
बम-बम हर-हर हो भारत भर
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।
भर दे भाव अभाव मिटे
कल्मष-कटुता स्वभाव मिटे
सुबुद्धि-विवेक जगे जन जन में
पूजूँ तुझको कंकड़-कंकड़
हे शिव शंभू,हे शिव शंकर।।
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