बुधवार, 13 मार्च 2019


ज़िन्दगी तेरे लिए
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ज़िन्दगी तेरे लिए
क्या क्या न किया
बेचैन रहा दिन-रात
पल भर न जिया।
हाय,ये क्या किया
मैंने ये क्या किया!

सोचा थोड़ा सुकूँ से
जीऊँगा ज़िन्दगी
अभी तो उम्र पड़ी है
क्या है धड़फड़ी
और और के फेर में
था लगा हड़बड़ी
उम्र तो तमाम हो गई
कहाँ जीया ज़िन्दगी?

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