शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2019

  है शहीदों को नमन
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एक बार, बस एक बार
मचाने दो क्रंदन
अरि का करने दो मर्दन
अरे खोल दो बंधन
हमारे भीम अर्जुन का।

कब तक कायराना
छुपा वार वो झेलें
कब तक मूक हो सहें
खाते रहें ढेले
करने दो अब सिंहनाद
हुंकार भरने दो
प्रचंड पुरुषार्थ के आवेग से
प्रहार करने दो
देश के नाज़ के खातिर
प्रतिकार करने दो
आतंकी नरपिशाचों में
नहीं इंसानियत का स्पंदन
अरे खोल दो बंधन
हमारे भीम अर्जुन का।

मुट्ठीभर देशद्रोही जो
सिरे से सिरफिरे हैं ं
मानवाधिकार की आड़ चीखे
ख़ुद मानवता से गिरे हैं
कायर क्लीव वो ढोंगी
जा वैरी से मिले हैं
उन रक्तबीजों का
लहू चाट जाने दो
रणभेरी बजाकर अब
रणभूमि पाट देने दो
वीरों की गर्जना से
प्रकम्पित हो गगन
अरे खोल दो बंधन
हमारे भीम अर्जुन का।

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