हमरा सबहक नेताजी
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रगड़ा झगड़ा ठनने फीरथि
से हमरा सबहक नेताजी।
पूज्य बनल रहता ओ कोना
बेबात फसाद करेता जी।
बतकुट्टनि के खेती सनगर
आ सौंसे आगि लगेता जी।
प्राण बसय हुनकर सत्ता मे
कुर्सी लय ग़दर मचेता जी।
चारि बरस धरि निमुआने सन
पचमे आबि फुसियेता जी।
जाइत-पाइत धर्मास्त्र बल
मरछाउर छीटि सुतेता जी।
आगाँ पाछाँ मोटर पों पों
औ अगबे धूलि फकेता जी।
चलती हुनकर की देखै छी
चलती देखबथि चहेता जी।
केहन अनबुझ बूझथि सबके
पढ़ने बिनु खूब पढ़ेता जी।
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रगड़ा झगड़ा ठनने फीरथि
से हमरा सबहक नेताजी।
पूज्य बनल रहता ओ कोना
बेबात फसाद करेता जी।
बतकुट्टनि के खेती सनगर
आ सौंसे आगि लगेता जी।
प्राण बसय हुनकर सत्ता मे
कुर्सी लय ग़दर मचेता जी।
चारि बरस धरि निमुआने सन
पचमे आबि फुसियेता जी।
जाइत-पाइत धर्मास्त्र बल
मरछाउर छीटि सुतेता जी।
आगाँ पाछाँ मोटर पों पों
औ अगबे धूलि फकेता जी।
चलती हुनकर की देखै छी
चलती देखबथि चहेता जी।
केहन अनबुझ बूझथि सबके
पढ़ने बिनु खूब पढ़ेता जी।
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