दीपावली संदेश
☆☆☆☆☆☆☆☆
आओ अबकी ऐसे दिया जलाएँ,
कि रौशन बाहर-अन्दर हो।
कल्मष-कटुता दह-बह जाए,
उमड़ा भाव-समन्दर हो।।
अभाव मिटे ना भाव बिना,
सब झूमे मस्तकलन्दर हो।
स्नेह-स्नेहक से मन-दिया भरा,
प्राण-वर्तिका अभ्यन्तर हो।।
श्रम-सीकर तन घिस-घिस चंदन,
श्री-लक्ष्मी का वन्दन हो।
हठात्-बलात् न हरण कर लाएँ,
प्रबल पुरुषार्थ से अभिनन्दन हो।।
प्रकाश-पर्व की शुचिता हेतु,
हर अंधकार की चिता जले।
जगमग ज्योतिर्मय जगती,
हों,अंदर-बाहर भले-भले।।
-----अशोक झा "दुलार"
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आओ अबकी ऐसे दिया जलाएँ,
कि रौशन बाहर-अन्दर हो।
कल्मष-कटुता दह-बह जाए,
उमड़ा भाव-समन्दर हो।।
अभाव मिटे ना भाव बिना,
सब झूमे मस्तकलन्दर हो।
स्नेह-स्नेहक से मन-दिया भरा,
प्राण-वर्तिका अभ्यन्तर हो।।
श्रम-सीकर तन घिस-घिस चंदन,
श्री-लक्ष्मी का वन्दन हो।
हठात्-बलात् न हरण कर लाएँ,
प्रबल पुरुषार्थ से अभिनन्दन हो।।
प्रकाश-पर्व की शुचिता हेतु,
हर अंधकार की चिता जले।
जगमग ज्योतिर्मय जगती,
हों,अंदर-बाहर भले-भले।।
-----अशोक झा "दुलार"
दीपावली:मेरी अभिव्यक्ति
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