सोमवार, 16 जुलाई 2018

आद्या

             आदिशक्ति:आद्या
       *******************
बालिके बनकर आदिशक्ति,प्रकट हुई आराध्या।
शशिमुख शीतलता समेट,उदित हुई है आद्या ।।

तिमिराछन्न धरा-गगन ,शुभ्रज्योत्सना नहलाई।
आविर्भाव अवनीतल पर,आनंद अमित लेआई।

ओ शक्तिस्वरूपा स्वयंप्रभा,निज आभा से जगमग हो।
तेरे दम से दमके दुनिया, भयमुक्त सकल अग-जग हो ।।

विद्या-बुद्धि विधायिनी,प्रखर प्रतिभा पुंज बनो।
शंखनाद हो नवयुग की,नवलगान की गुंज बनो

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें