आदिशक्ति:आद्या
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बालिके बनकर आदिशक्ति,प्रकट हुई आराध्या।
शशिमुख शीतलता समेट,उदित हुई है आद्या ।।
तिमिराछन्न धरा-गगन ,शुभ्रज्योत्सना नहलाई।
आविर्भाव अवनीतल पर,आनंद अमित लेआई।
ओ शक्तिस्वरूपा स्वयंप्रभा,निज आभा से जगमग हो।
तेरे दम से दमके दुनिया, भयमुक्त सकल अग-जग हो ।।
विद्या-बुद्धि विधायिनी,प्रखर प्रतिभा पुंज बनो।
शंखनाद हो नवयुग की,नवलगान की गुंज बनो
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बालिके बनकर आदिशक्ति,प्रकट हुई आराध्या।
शशिमुख शीतलता समेट,उदित हुई है आद्या ।।
तिमिराछन्न धरा-गगन ,शुभ्रज्योत्सना नहलाई।
आविर्भाव अवनीतल पर,आनंद अमित लेआई।
ओ शक्तिस्वरूपा स्वयंप्रभा,निज आभा से जगमग हो।
तेरे दम से दमके दुनिया, भयमुक्त सकल अग-जग हो ।।
विद्या-बुद्धि विधायिनी,प्रखर प्रतिभा पुंज बनो।
शंखनाद हो नवयुग की,नवलगान की गुंज बनो
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