गुरुवार, 31 जनवरी 2019

ये दुनिया है
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ये दुनिया है,यहाँ बाबू
हर चीज की अपनी कीमत है।
जितना चाहे लेना चाहो
ग़र मूल्य चुकाने की हिम्मत है।।
अगर पाने की कुछ है तमन्ना
कुछ खोने को रहना तैयार।
बड़ा सहज औ सरल गणित है
मुफ़्त नहीं है कुछ भी यार।।
दो ध्रुवीय है दुनिया अपनी
दो-दो के सब जोड़े हैं।
जोड़-घटाव गुण-भाग बरोबर
ना ज़्यादा ना थोड़े हैं।।
पाता प्रेम अस्तित्व,घृणा से
झूठ बिना ना सच की पहचान।
समझे कैसे क्या ईमान है
जो जग में ना हो बेईमान।।
अच्छे-भले बने फिरते हो
अरे बुरों को दो सम्मान ।
'भला'भले हैं उनके दम से
वर्ना उनकी क्या होगी शान!!
ये दुनिया है,यहाँ पर बाबू
ये मेले लगे रहेंगे।
गुण-दोष भुला कर जी लो
कल हम तुम कहाँ रहेंगे।।

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