काम करो और बातें कम
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बातों से बात नहीं बनती
काम किए जा छोड़ शरम।
गाँठ बाँध लो मंत्र सरीखा
काम से जाता दुर्दिन थम।
काम करो और बातें कम।।
हैं जो कर्मठ बातों में उनकी
ठसक अलग और होता दम।
कैसी भी हो हालात मगर
घेर ना पाता उनको ग़म।
काम करो और बातें कम।।
कर्महीन हीं भाग्य भरोसे
बैठे रहते हैं हरदम।
कर्म बिना फल की चाहत
पाला करता है वो भरम।
काम करो और बातें कम।।
लगे काम में,दु:ख बिसराता
कुदरत का भी यहीं नियम।
काम से काम रखे हर कोई
इससे बढ़कर कौन धरम।
काम करो और बातें कम।।
__अशोक झा'दुलार'
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बातों से बात नहीं बनती
काम किए जा छोड़ शरम।
गाँठ बाँध लो मंत्र सरीखा
काम से जाता दुर्दिन थम।
काम करो और बातें कम।।
हैं जो कर्मठ बातों में उनकी
ठसक अलग और होता दम।
कैसी भी हो हालात मगर
घेर ना पाता उनको ग़म।
काम करो और बातें कम।।
कर्महीन हीं भाग्य भरोसे
बैठे रहते हैं हरदम।
कर्म बिना फल की चाहत
पाला करता है वो भरम।
काम करो और बातें कम।।
लगे काम में,दु:ख बिसराता
कुदरत का भी यहीं नियम।
काम से काम रखे हर कोई
इससे बढ़कर कौन धरम।
काम करो और बातें कम।।
__अशोक झा'दुलार'
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