फ़ासला भी ज़रूरी है
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होती कभी तो मज़बूरी है
अनचाही हो जाती दूरी है।
और कभी लगता है ऐसा
यह फ़ासला भी ज़रूरी है।।
भाग रहा जीवन पल-छिन
रह जाती समझ अधूरी है।
पास पास रहकर हरदम हीं
महत्त्व न दिखता पूरी है।।
हममें ये फ़ासला ज़रूरी है।।
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होती कभी तो मज़बूरी है
अनचाही हो जाती दूरी है।
और कभी लगता है ऐसा
यह फ़ासला भी ज़रूरी है।।
भाग रहा जीवन पल-छिन
रह जाती समझ अधूरी है।
पास पास रहकर हरदम हीं
महत्त्व न दिखता पूरी है।।
हममें ये फ़ासला ज़रूरी है।।
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