शुक्रवार, 10 मई 2019

आँखें हार गई
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युगों युगों से
मन बाबरी भई।
तेरे रंग रंगी ऐसों
कि दिल माने ना
और आँखें हार गई।

सुध भी तेरी
बुध भी तेरी
सुध-बुध खोई
तू ही तू संसार हुई।
मिट गई हस्ती
मेरी तुझमें
मैं मुझसे ही निकल
प्रेम की दरिया पार गई।
     _अशोक झा'दुलार'

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