आँखें हार गई
*********** तकती राहें
युगों युगों से
मन बाबरी भई।
तेरे रंग रंगी ऐसों
कि दिल माने ना
और आँखें हार गई।
सुध भी तेरी
बुध भी तेरी
सुध-बुध खोई
तू ही तू संसार हुई।
मिट गई हस्ती
मेरी तुझमें
मैं मुझसे ही निकल
प्रेम की दरिया पार गई।
_अशोक झा'दुलार'
*********** तकती राहें
युगों युगों से
मन बाबरी भई।
तेरे रंग रंगी ऐसों
कि दिल माने ना
और आँखें हार गई।
सुध भी तेरी
बुध भी तेरी
सुध-बुध खोई
तू ही तू संसार हुई।
मिट गई हस्ती
मेरी तुझमें
मैं मुझसे ही निकल
प्रेम की दरिया पार गई।
_अशोक झा'दुलार'
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