शनिवार, 25 मई 2019

चेहरे के पीछे चेहरा है
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दिखता वो जो है नहीं
तन कहीं और मन कहीं
भीतर भभकता गंद बड़ी
कुत्सित कुंठा गहरा है
चेहरे के पीछे चेहरा है।।

लगता ऐसा सुनता सबका
करता है बस अपने मन का
कानों पर तो जूं न रेंगे
सच में वो तो बहरा है
चेहरे के पीछे चेहरा है।।

लूटमार कर महल खड़ा
ऐशगाह है भरा पड़ा
असलियत ना दिख जाए
पहरों पै लगा पहरा है
चेहरे के पीछे चेहरा है।।
  _अशोक झा'दुलार'

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