शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019


हमने आँसू छुपा लिए
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कुछ अपनों का दिया ज़ख़्म था
जिसके लिए मरे-जिए थे।
दुनिया में क़ायम रहे भरोसा
हमने आँसू छुपा लिए थे।।

भरोसे पर ही चलती दुनियादारी
भरम ही सही ज़रूरी है।
भरोसेमंद अगरचे होते नहीं सब
होती कुछ की मज़बूरी है।
समझ यहीं होंठों को सिल दिए थे
हमने आँसू छुपा लिए थे।।
     __अशोक झा'दुलार'

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