शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

ऐ दिल मुझे सम्भाल
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तन का नहीं भरोसा
मन की बहकती चाल।
इधर-उधर डगमगाऊँ
ऐ दिल मुझे सम्भाल।।

देता न दिल है धोखा
जाने वो सच्चा हाल।
पूछ करे कुछ दिलसे
फिर क्यूँ रहे मलाल!!

दिल की कही बातें
हरगिज़ ना देवें टाल।
बसते वहाँ स्वयं हैं
राम-रहीम-गोपाल।।
   __अशोक झा 'दुलार'

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