मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

थोड़ा-सा इंतज़ार करो
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मत हो अधीर
मत हो निराश
बस, थोड़ा-सा इंतज़ार करो।
छँटेगा अँधेरा
छँटेगें हीं धुंध
मज़े उसके भी,ना तिरस्कार करो।
रूठे हैं अपने
मुँह फेर खड़े
थोड़ा मान,थोड़ा मनुहार करो।
लगन लक्ष्य की
विघ्न-पहाड़ चढ़
श्रमजल से धरा का श्रृंगार करो।
नफ़रतों की दीवारें
दूरियां दिलों की
ढहाकर पाट दो,ढेरों प्यार करो।
मत हो अधीर
मत हो निराश
बस,थोड़ा सा इंतज़ार करो ।
        __अशोक झा'दुलार'

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